या-लैता सबा क़ुतुब-नगरी मोहे पी की खबरिया सुना तो सही
या-लैता सबा क़ुतुब-नगरी मोहे पी की खबरिया सुना तो सही
ताहिर मुरादाबादी
MORE BYताहिर मुरादाबादी
या-लैता सबा क़ुतुब-नगरी मोहे पी की खबरिया सुना तो सही
मोर चैन गया मोरी नींद गई वा की निकहत ज़ुल्फ़ सुँघा तो सही
ज़-फ़िराक़-ए-तू बर मन हाल-ए-ज़बूँ जो गुज़रती है बिपता वो किस से कहूँ
तोये घट में रखूँ कभी जाए न-देवा मोरी नैनों में आ के समा तो सही
चू रोज़-ए-अज़ल तु ब-गुफ़्त ज़-मा तोरी बतियाँ वो सगरी हैं याद पिया
वो ही लब पे है नग़्मा-ए-क़ालू-बला तू अलस्त की मुरली बजावत है
उसे दिल तो 'अबस घबरावत है मोरी
तोरा श्याम खेना वो आवत है वाकी राह में पलकन बिछा तो सही
मुझे राह में देख के मोरे कुँवर का हो कैसी न लुत्फ़-ओ-करम की नजर
गहे गुफ़्त न अज़ मन ख़स्ता-जिगर कि तु जात कहाँ ज़रा आ तो सही
बर हाल-ए-तबाह मिन्नत बन कर पिया नींद न आवत आठ-पहर
मोहे सूनी सिजिरिया पे लागे है डर जरा लोरियाँ गा के सुला तो सही
चु ब-तैबा गुज़र गई बाद-ए-सबा तो ये कहना नबी जी से बहर-ए-खु़दा
एक 'ताहिर'-ए-ज़ार जो हिन्द में है वा को अपने द्वारे बुला तो सही
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