Sufinama
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Abdul Rahman

Delhi, India

Abdul Rahman

Doha 6

बारी बारी बैस में वारी सौति श्रृंगार।

हारी हारी करत है हारी हेरत हार।।

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चुनी चुनी पहिरी सुरँग चुनी सौति दल कीन।

बनी बनी रस सो सरस तना तनी कुच पीन।।

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नर राची मेंना लखी तू कित लिख्यो सुजान।

पढ़ कुरान भौरा भयो सुन राच्यो रहमान।।

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पलकन में राखौ पियहि पलकन छाड़ौ संग।

पुतरी सो तै होहि जिन डरपत अपने अंग।।

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बानी बानी देत शुभ जस बाती तस रीति।

रहैमान ताको तबै रहैमान चित प्रीति।।

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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