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पद
गरज रहै अंतर राम अलेख
गरज रहै अंतर राम अलेख,गरज रहै अंतर राम अलेख,पांच पचीस तीन गुण भागा, अन्तर रही न रेख।।
महात्मा कल्याणदास जी
कवित्त
गरज नगारे भारे वृन्द हरकारे आगे।
गरज नगारे भारे वृन्द हरकारे आगे।ध्वजा धारे धुरवा गजतीना बदन के।
क़ादिर बख़्श
पद
सुरत की प्रगति - आज घिर आये बादल कारे गरज गरज घन गगन पुकारे
आज घिर आये बादल कारे गरज गरज घन गगन पुकारेरिम-झिम बरसत बूँद अमी की बिजली चमक घट नैन निहारे
शालीग्राम
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राग आधारित पद
ठुमरी खम्माच- बहियां न पकरो मोरी मुरकि कलाई रे।
अरज गरज मोरी एको न मानी।हैदर पिया की मैं देत दुहाई रे।।
हैदर
कविता
घन हैं न कारे कारे भारे गजराज हैं री,
चंद्रकला चपला न चमक असिन की है,गरज न रोष भारी सेना घोर गाजी है ।
चंद्रकला बाई
सतसई
।। बिहारी सतसई ।।
नाह गरजि नाहर-गरज बोलु सुनायौ टेरि।फँसी फौज मैं बंदि-बिच हँसी सबनु तनु हेरि।।215।।
बिहारी
ग़ज़ल
माइल हूँ गुल-बदन का मुझे गुल सीं क्या ग़रज़काकुल में उस के बंद हूँ सुम्बुल सीं क्या ग़रज़
सिराज औरंगाबादी
दोहरा
हक्को अलफ काफ़ी मुलां बे दी गरज़ न काई ।
हक्को अलफ़ काफ़ी मुलां बे दी गरज़ न काई ।अव्वल आख़र ज़ाहर बातन नाल अलफ़ दे लाई ।