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दोहा
लोक जू काजर की लगी अंग लगे उर लाल
लोक जू काजर की लगी अंग लगे उर लालआज उनीदे आइए जागे कहाँ 'जमाल'
जमाल
दोहा
परि कटारी विरह की टूट रही उर साल
परि कटारी विरह की टूट रही उर सालमूएँ पीछैं जो मिलौ जीयत मिलौ 'जमाल'
जमाल
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दोहा
'रहमन' गली है सॉकरी दूजो ना ठहराहिं
'रहमन' गली है सॉकरी दूजो ना ठहराहिंआपु अहै तो हरि नहीं हरि तो आपुन नाहिं
रहीम
ढकोसला
खीर पकाई जतन से और चरख़ा दिया चलाए
खीर पकाई जतन से और चरख़ा दिया चलाएआया कुत्ता खा गया तू बैठी ढोल बजाए
अमीर ख़ुसरौ
ढकोसला
भैंस चढ़ी बिटोरी और लप लप गूलर खाए
भैंस चढ़ी बिटोरी और लप लप गूलर खाएउतर आ मेरे राँड की कही हूपज़ न फट जाए
अमीर ख़ुसरौ
ढकोसला
भैंस चढ़ी बबूल पर और लप लप गूलर खाए
भैंस चढ़ी बबूल पर और लप लप गूलर खाएदुम उठा के देखा तो पूरनमासी के तीन दिन
अमीर ख़ुसरौ
फ़ारसी कलाम
अमीर ख़ुसरौ
क़िस्सा
क़िस्सा चहार दर्वेश
अब क़िस्सा शुरू करता हूँ- ज़रा कान धरकर सुनो और मुन्सिफ़ी करो! चार दर्वेश की सैर