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फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ऐ ग़म्ज़: ज़न कि तीर-ए-जफ़ा दर कमान-ए-तुस्तआहिस्तः ज़न कि गर्दन-ए-मा दर इ’नान-ए-तुस्त
अमीर ख़ुसरौ
ग़ज़ल
ये जो लगा है तीर मुझे ऐ कमान-ए-इश्क़महशर में देखियो यही होगा निशान-ए-इश्क़
ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
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फ़ारसी कलाम
शहीद-ए-तीर-ए-आँ तुर्कम कि अज़ अबरू कमाँ दारदख़दंग अज़ शुस्त-ए-आँ-ख़ुर्दम कि अज़ मिज़्गाँ सिनाँ दारद
रूमी
सूफ़ी उद्धरण
बुरे कामों से परहेज़ करना, इंसान के लिए भलाई और हिफ़ाज़त की वजह है। ऐसे नेक इंसान को इस ज़िंदगी में ही निजात मिल जाती है। उस का जीवन मानो अमर हो जाता है।
गुरु नानक
सूफ़ी उद्धरण
बुरे कामों से परहेज़ करना, इंसान के लिए भलाई और हिफ़ाज़त की वजह है। ऐसे नेक इंसान को इस ज़िंदगी में ही निजात मिल जाती है। उस का जीवन मानो अमर हो जाता है।
सादी शीराज़ी
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
गुफ़्ता कि कीस्त बर दर गुफ़्तम कमीं ग़ुलामतगुफ़्ता चे कार दारी गुफ़्तम महा सलामत
रूमी
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
गुफ़्ता कि ई तु बा मा गुफ़्तम कमीं गु़लामतगुफ़्ता मगर तु मस्ती गुफ़्तम बले ज़े जामत
शैख़ अब्दुल क़ादिर जिलानी
सूफ़ी उद्धरण
अच्छे कामों का मे’यार सिर्फ एक ही है और वो ये कि इंसानियत को मसर्रत हासिल हो।
अच्छे कामों का मे’यार सिर्फ एक ही है और वो ये कि इंसानियत को मसर्रत हासिल हो।
अज्ञात
फ़ारसी कलाम
kamiin-e-banda-e-tuu मा हम: मौला तुई मा रागिरफ़्तः फ़ैज़-ए-तू हिंद-ओ-समरकंद-ओ-बुख़ारा रा
शाह मोहसिन दानापुरी
दकनी सूफ़ी काव्य
मसनवी 'तुराब' दकनी
कमान अबरू निगाहे ख़ंजर पलक तीरअदा सैफ़ दुधारा ज़ुलफ़ ज़ंजीर