Font by Mehr Nastaliq Web

मोहम्मद का करम अल्लाह की रहमत बन गया सेहरा

अनवर फ़र्रूख़ाबादी

मोहम्मद का करम अल्लाह की रहमत बन गया सेहरा

अनवर फ़र्रूख़ाबादी

MORE BYअनवर फ़र्रूख़ाबादी

    मोहम्मद का करम अल्लाह की रहमत बन गया सेहरा

    बुज़ुर्गों की दु’आ से वज्ह-ए-राहत बन गया सेहरा

    बे-हमदिल्लाह सर-ए-नौशाह की ज़ीनत बन गया सेहरा

    ख़ुदा के फ़ज़्ल से पैग़ाम-ए-सुन्नत बन गया सेहरा

    कि दूल्हा और दुल्हन की मोहब्बत बुन गया सेहरा

    बहार-ए-शादमानी आई है अल्लाह की रहमत से

    खुली हैं आज अरमाँ की कलियाँ उस की क़ुदरत से

    ये जलसा बज़्म-ए-'इशरत बन गया शादी की बरकत से

    सर-ए-महफ़िल ’अज़ीज़ों ने जो देखा चश्म-ए-उल्फ़त से

    तो भाई की ख़ुशी बहनों की चाहत बन गया सेहरा

    सुनो दोस्तों इक मध-भरी झनकार है शादी

    मुबारक हो नशात-ओ-’ऐश का शहकार है शादी

    मोहब्बत का यक़ीं है प्यार का इज़हार है शादी

    जो वालिद की ख़ुशी तो वालिदा का प्यार है शादी

    सर-ए-महफ़िल 'अज़ीज़ों की मसर्रत बन गया सेहरा

    सजा दूल्हा तो प्यार आने लगा फूलों के गजरे को

    बहारें देखती ही रह गईं नौशा के चेहरे को

    हसीं लड़ियों से चूमा झूम कर एक जल्वे को

    सजाया हम ने यूँ अल्फ़ाज़ के फूलों से सेहरे को

    दुल्हन की तरह 'अनवर' ख़ूबसूरत बन गया सेहरा

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY
    बोलिए