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अज़ीज़ मियाँ

1942 - 2000 | लाहौर, पाकिस्तान

अज़ीज़ मियाँ

वीडियो 45

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वीडियो का सेक्शन
हास्य वीडियो
अंधेरे में दिल के चराग़-ए-मोहब्बत ये किस ने जलाया सवेरे-सवेरे

अज़ीज़ मियाँ

अल्लाह ही जाने कौन बशर है

अज़ीज़ मियाँ

आँख वाला तिरे जोबन का तमाशा देखे

अज़ीज़ मियाँ

आप जिन के क़रीब होते हैं

अज़ीज़ मियाँ

'आसी हूँ बख़्श देने को उस ने कहा तो है

अज़ीज़ मियाँ

इधर ज़िंदगी का जनाज़ा उठेगा

अज़ीज़ मियाँ

'इश्क़ की वारदात कुछ भी न थी

अज़ीज़ मियाँ

'इश्क़ में ज़िंदगी का मज़ा है यही 'आशिक़-ए-ज़ार पहलू बदलता रहे

अज़ीज़ मियाँ

उन की आँखों से मस्ती बरसती रहे होश उड़ते रहें दौर चलता रहे

अज़ीज़ मियाँ

उस तेरे सर की क़सम फ़र्क़ सर-ए-मू भी नहीं

अज़ीज़ मियाँ

ऐ तुर्क ग़म्ज़ः-ज़न कि मुक़ाबिल नशिस्तः-ई

अज़ीज़ मियाँ

कभी कहा न किसी से तिरे फ़साने को

अज़ीज़ मियाँ

कहाँ थे आप ज़माने के बा'द आए हैं

अज़ीज़ मियाँ

कोई आए कोई जाए ये तमाशा क्या है

अज़ीज़ मियाँ

ख़्वाजः-ए-ख़्वाजगाँ मु'ईनुद्दीं

अज़ीज़ मियाँ

ग़रीबम या-रसूलल्लाह ग़रीबम

अज़ीज़ मियाँ

जफ़ाओं पर मलाल तो होगा

अज़ीज़ मियाँ

जवाब-ए-शिकवा

दिल से जो बात निकलती है असर रखती है अज़ीज़ मियाँ

जिन के दरबान हैं सारे जिन्न-ओ-मलक

अज़ीज़ मियाँ

जो तेरी फ़िक्र तिरी याद में ख़राब नहीं

अज़ीज़ मियाँ

तड़पते हैं मचलते हैं बहुत अरमान सीने में

अज़ीज़ मियाँ

तेरी सूरत निगाहों में फिरती रहे 'इश्क़ तेरा सताए तो मैं क्या करूँ

अज़ीज़ मियाँ

दिल जला कर मेरा मुस्कुराते हैं वो

अज़ीज़ मियाँ

नसीम-ए-सुब्ह गुलशन में गुलों से खेलती होगी

अज़ीज़ मियाँ

बर-गश्ता-ए-यज़्दाँ से कुछ भूल हुई है

अज़ीज़ मियाँ

बे-वफ़ा यूँ तेरा मुस्कुराना

अज़ीज़ मियाँ

बहुत कठिन है डगर पनघट की

अज़ीज़ मियाँ

भर दो झोली मेरी या मोहम्मद लौट कर मैं न जाऊँगा ख़ाली

अज़ीज़ मियाँ

मनम मह्व-ए-जमाल-ए-ऊ नमी-दानम कुजा रफ़्तम

अज़ीज़ मियाँ

मरीज़-ए-मोहब्बत उन्हीं का फ़साना सुनाता रहा दम निकलते-निकलते

अज़ीज़ मियाँ

माटी के पुतले तुझे कितना गुमान है

अज़ीज़ मियाँ

मिरी आँखों में अश्कों का नज़ारा कौन देखेगा

अज़ीज़ मियाँ

ये है मय-कदा यहाँ रिंद हैं यहाँ सब का साक़ी इमाम है

अज़ीज़ मियाँ

या मोहम्मद नूर-ए-मुजस्सम या हबीबी या मौलाई

अज़ीज़ मियाँ

या-साहिबल-जमाल-ओ-या-सयय्दल-बशर

अज़ीज़ मियाँ

रंग के धनी हो मेरी रंग दो चुनरिया

अज़ीज़ मियाँ

रुत अलबेली रात अकेली दिल की पहेली जान लो

अज़ीज़ मियाँ

वो जो तेरे फ़क़ीर होते हैं

अज़ीज़ मियाँ

वो दिल ही क्या तिरे मिलने की जो दु'आ न करे

अज़ीज़ मियाँ

शिकवा

क्यूँ ज़ियाँ-कार बनूँ सूद-फ़रामोश रहूँ अज़ीज़ मियाँ

’अदम से लाई है हस्ती में आरज़ू-ए-रसूल

अज़ीज़ मियाँ

आज रंग है ऐ महा-रंग है री

अज़ीज़ मियाँ

मन कुंतो मौला

अज़ीज़ मियाँ

मन कुंतो मौला फ़-हाज़ा अलीयुन मौला

अज़ीज़ मियाँ

यार को हम ने जा-ब-जा देखा

अज़ीज़ मियाँ

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