Sufinama

फ़ारसी सूफ़ी कवि

फ़ारसी सूफ़ी कवि

हैदराबाद के मश्हूर अबुल-उ’लाई सूफ़ी

1078 -1166 बग़दाद

सिल्सिला-ए-क़ादिरिया के बानी और नामवर सूफ़ी

1253 -1325 दिल्ली

ख़्वाजा निज़ामुद्दीन औलिया के चहेते मुरीद और फ़ारसी-ओ-उर्दू के पसंदीदा सूफ़ी शाइ’र, माहिर-ए-मौसीक़ी, उन्हें तूती-ए-हिंद भी कहा जाता है

1254 -1337 दिल्ली

ख़्वाजा निज़ामुद्दीन औलिया के मुरीद और फ़वाइदुल-फ़ुवाद के जामे’

महबूबान-ए-ख़ुदा की फ़िहरिस्त में एक अ’ज़ीम नाम

आ’लमी फ़ारसी रुबाई-गो शाइ’र और फ़लसफ़े की दुनिया का उस्ताद जिनका अपना कलेंडर था, आपके इ’ल्म-ओ-फ़ज़्ल का ए’तराफ़ अहल-ए-ईरान से बढ़ कर अहल-ए-यूरोप ने किया

1235 -1187 दिल्ली

ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिशती के मुमताज़ मुरीद-ओ-ख़लीफ़ा और जानशीन

‘’आपको पाता नहीं जब आपको पाता हूँ मैं’’ लिखने वाले शाइ’र

1142 -1236 अजमेर

हिन्दुस्तान के मशहूर सूफ़ी जिन्हें ग़रीब-नवाज़ और सुलतानुल-हिंद भी कहा जाता है

1721 -1785 दिल्ली

सूफ़ी शाइ’र, हिन्दुस्तानी मौसीक़ी के गहरे इ’ल्म के लिए मशहूर

1715 -1788 पटना

अ’ज़ीमाबाद के मुम्ताज़ सूफ़ी शाइ’र और बारगाह-ए-हज़रत-ए- इ’श्क़ के रूह-ए-रवाँ

‘’ख़ुद का पर्दा है तो ख़ुद ख़ुद को ज़रा देख तो ले' के लिए मशहूर

1902 -1978 कराची

मा’रूफ़ शाइ’र, अदीब, मुसन्निफ़ और सूफ़ी

1414 -1492 हिरात

सूफ़ियाना शे’र कहने वाला एक आ’लमी शाइ’र और मुसन्निफ़

1615 -1659 दिल्ली

मुग़्लिय्या सल्तनत के बादशाह शाहजहाँ और मलिका मुमताज़ के बड़े साहिबज़ादे जिन्हों ने सूफ़ियाना रिवायत को मज़ीद जिला बख़्शी, उनके तअ’ल्लुक़ात सिखों के गुरुओं से निहायत ख़ुश-गवार थे

1141 -1209 गांजा

मस्नवी मख़ज़नुल-असरार, ख़ुसरौ शीरीं और लैला मज्नूँ के मुसन्निफ़

ख़ानक़ाह-ए-मुजीबिया, फुलवारीशरीफ़ के सज्जादा-नशीं और बिहार के मुमताज़ फ़ारसी-गो शाइ’र

1145 -1220/21 निशापुर

नीशापूर के अ’ज़ीम शाइ’र, मुसन्निफ़ और अदवियात के माहिर

1209 -1324 पानीपत

मशहुर सूफ़ी बुज़ुर्ग बू-अ’ली शाह क़लंदर

1813 -1882 आगरा

मय-कश अकबराबादी के जद्द-ए-अमजद

1250 -1320 शब्सतर

आठवीं सदी हिज्री के आ’रिफ़, अदीब-ओ-शाइ’र

1797 -1869 दिल्ली

महान शायर/विश्व-साहित्य में उर्दू की आवाज़/सब से अधिक लोकप्रिय सुने और सुनाए जाने वाले अशआर के रचयिता

1699 -1781 दिल्ली

दिल्ली के मा’रूफ़ नक़्शबंदी मुजद्ददी बुज़ुर्ग और मुमताज़ सूफ़ी शाइ’र

1207 -1273 कोन्या

मशहूर फ़ारसी शाइ’र, मसनवी-ए-मा’नवी, फ़िहि माफ़ीह और दीवान-ए-शम्स तबरेज़ी के मुसन्निफ़, आप दुनिया-भर में अपनी ला-ज़वाल तसनीफ़ मसनवी की ब-दौलत जाने जाते हैं, आपका मज़ार तुर्की में है ।

ग्यारहवीं सदी हिज्री का एक लाहौरी शाइ’र

1929 -1993 लाहौर

पाकिस्तान की मशहूर रुहानी शख़्सियत और मुमताज़ मुसन्निफ़

बाबा फ़रीदुद्दीन गंज शकर के मुम्ताज़ ख़लीफ़ा

जनाब हुज़ूर शाह अमीन अहमद फ़िरदौसी बिहारी के साहिबज़ादे

नातिया अदब के शोधकर्ता और खानकाह हलीमिया अबुलउ'लाइया, इलाहाबाद के प्रसिद्ध सज्जादा नशीन

1767 -1858 काकोरी

अवध के मा’रूफ़ सूफ़ी शाइ’र और रुहानी हस्ती

1703 -1762 दिल्ली

बर्र-ए-सग़ीर के नाम-वर आ’लिम-ए-दीन और मुहद्दिस

1590 -1661 दिल्ली

मशहूर रुबाई-गो शाइ’र और शहीद-ए-इ’श्क़ जिन्हें अ’ह्द-ए-औरंगज़ेब में शहीद कर दिया गया था

इस्फ़हान के मुम्ताज़ शाइ’र

1184 -1292 शिराज़

ईरान के एक बड़े मुअ’ल्लिम, आपकी दो किताबें गुलसिताँ और बोसतां बहुत मशहूर हैं, पहली किताब नस्र में है जबकि दूसरी किताब नज़्म में है

1880 -1951 आगरा

मुमताज़ और जदीद शाइ’रों में नुमायां, सैकड़ों शागिर्दों के उस्ताद और हाजी वारिस अ’ली शाह के मुरीद

1315 -1390 शिराज़

फ़ारसी के मक़बूल-तरीन शाइ’र और फ़ाल-नामा के लिए मशहूर