नादिर देहलवी के अशआर
‘नादिर’ फ़िराक़-ए-यार में मजनूं तो बन गया
ख़ाना-बदोश बैठ कहीं तेरा घर भी है
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टैग : घर
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere