फ़र्द फुलवारवी के अशआर
जिसे तुम ग़ैर समझे हो उसे हम यार कहते हैं
जहाँ को हम सरासर जल्वा-ए-दीदार कहते हैं
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere