इक़बाल सफ़ीपुरी का परिचय
उपनाम : 'इक़बाल'
मूल नाम : इक़बाल अहमद ख़लीली
जन्म : 09 Jul 1921 | उन्नाव, उत्तर प्रदेश
इक़बाल सफ़ीपुरी (मूल नाम: इक़बाल अहमद ख़लीली) उर्दू अदब के एक प्रतिष्ठित शायर थे, जिनका संबंध ग़ज़ल की क्लासिकी रिवायत से रहा। उनका जन्म 9 जुलाई 1919 को क़स्बा सफीपुर, ज़िला उन्नाव में हुआ।
उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा अरबी और फ़ारसी में प्राप्त की, जिसने उनकी शायरी को मज़बूत ज़बानी और अदबी बुनियाद प्रदान की। 1936 में लखनऊ से मैट्रिक उत्तीर्ण करने के पश्चात उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और इसी दौरान अदबी हलकों से उनका गहरा संबंध स्थापित हुआ। मिर्ज़ा जाफ़र अली ख़ाँ असर लखनवी के माध्यम से उन्हें रोज़गार भी प्राप्त हुआ।
इक़बाल सफ़ीपुरी की शायराना तरबियत में कई महत्वपूर्ण उस्तादों का योगदान रहा। विशेष रूप से जिगर मोरदाबादी से उन्हें इस्लाह मिली, जिसने उनकी ग़ज़ल को परिपक्वता प्रदान की। इसके अतिरिक्त अफ़्क़र मोहानी और असर लखनवी से भी उन्होंने अदबी मार्गदर्शन प्राप्त किया।
विभाजन के पश्चात वे पाकिस्तान चले गए, जहाँ उन्होंने लाहौर और कराची में विभिन्न सरकारी विभागों, विशेषतः फ़ूड विभाग और बिल्डिंग कंट्रोल में सेवाएँ दीं। 1981 में वे आर्किटेक्ट के पद से सेवानिवृत्त हुए।
उनकी प्रमुख कृतियों में शाख़-ए-गुल (1981), जो ग़ज़लों का संग्रह है, तथा रंग-ओ-नूर, एक नातिया मजमूआ, विशेष उल्लेखनीय हैं।
22 मई 1999 को उनका निधन हुआ। वे उर्दू शायरी की क्लासिकी परंपरा के एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधि के रूप में स्मरण किए जाते हैं।