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ख़्वाजा मासूम सरहिन्दी

1598 - 1668 | सरहिंद, भारत

ख़्वाजा मासूम सरहिन्दी

सूफ़ी उद्धरण 14

तसव्वुफ़ बेचैनी और तड़प का नाम है। जब सुकून गया तो तसव्वुफ़ रहा। खुदा की राह का तालिब कभी बिन बेचैनी और तड़प के नहीं होता। कोई भी आरिफ़ बिना दर्द और दुख के नहीं होता। जब हमारे नबी हमेशा इस बेचैनी और तड़प में मुब्तिला थे, तो दूसरों की तो क्या ही बात की जाए।

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दिल को हमेशा साफ और पाक रखना चाहिए। जिस दिल पर खुदा की नजर पड़ी, वो इस दुनिया की ख़ूबसूरत चीज़ों से बरतर है। दिल की सफ़ाई खुदा को याद करने से जुड़ी है, इसलिए हमेशा ज़िक्र और फ़िक्र में लगे रहो और बातिन के सबक़ को संभालकर रखो।

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याद रखो! हमारी इज़्ज़त ईमान और मारिफ़त से जुड़ी है, दौलत और ऊँचे ओहदे से नहीं। अपने ईमान की तकमील की कोशिश करो और मारिफ़त में ऊँचे दर्जे हासिल करने के लिए मेहनत करो। इस बड़े मक़सद के लिए जितनी ज़्यादा तकलीफ़ उठाओगे, उतना ही बेहतर है।

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रिज़्क़ का तंग करना और कुशादा करना ख़ुदा ही का काम है। किसी को इस में दख़्ल नहीं है।

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लोगों के साथ अच्छा बर्ताव करना, भलाई करना, मुस्कुराते हुए मिलना, अच्छा स्वभाव रखना और उनके मामलों में आसानी और नर्मी बरतना—इन सब बातों को खुदा की रजामंदी का जरिया, निजात का की वजह और अपनी तरक़्की का रास्ता समझो।

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