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Khwaja Ubaidullah Ahrar's Photo'

ख़्वाजा उबैदुल्लाह अहरार

1404 - 1490 | समरक़न्द, उज़्बेकिस्तान

ख़्वाजा उबैदुल्लाह अहरार के सूफ़ी उद्धरण

आदाब-ए-तरीक़त में से एक बात यह भी है कि इंसान हमेशा बा-वुज़ू रहे। हमेशा वुज़ू से रहने से रिज़्क़ में बरकत पैदा होती है।

अगर किसी को ज़िक्र में इतनी महारत हो जाए कि उस का दिल हमेशा ज़िक्र के लिए हाज़िर हो और अगर उस ज़िक्र करने वाले का ताल्लुक़ ख़ुदा से भी हो, तो उस आदमी को अबरार जानो।

बेहतरीन अमल मुहासिबा है। अगर पूरा दिन इबादत बंदगी में गुज़रा, तो अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए। अगर पूरा दिन गुनाह में ज़ाया हुआ, तो अस्तग़फ़ार तौबा करनी चाहिए।

हिम्मत इसे कहते हैं कि किसी काम के लिए दिल को इस तरह जमा कर लिया जाए कि उसके सिवा कोई दूसरा ख़्याल या दिल में दाख़िल ही हो सके।

इंसान के आमाल अख़लाक़ का असर बेजान चीज़ों पर भी पड़ता है। चुनांचे अगर कोई शख़्स किसी ऐसी जगह नमाज़ अदा करे, जहां नापसंदीदा काम होते हों, तो उस नमाज़ में वो नूरानियत और बरकत पैदा नहीं होगी, जो किसी पाकीज़ा मक़ाम पर नमाज़ पढ़ने से हासिल होती है।

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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