असली सच्चाई ये है कि तुम वहाँ भी सच बोलो, जहाँ झूठ बोले बग़ैर निजात मुमकिन न हो।
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उसे देखो, जो तुम्हें देखता है। उस से मुहब्बत करो, जो तुम से मुहब्बत करता है। उस की सुनो, जो तुम्हारी सुनता है। अपना हाथ उसे दो, जो थामने के लिए तैयार है।
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जब लोग फ़सल काट रहे हों, तब बीज और खेती की बातें करना बे-मानी है।
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दुनिया की दौलत इकट्ठा करने की हवस, इंसानों को जल्दबाज़ी करने पर उकसाने वाली चीज़ है।
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शिकस्ता क़ब्रों में ग़ौर कर, कैसे-कैसे हसीनों की मिट्टी ख़राब हो रही है।
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