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अबू अब्दुल रहमान सुलमी

880 - 1015 | कूफ़ा, इराक़

अबू अब्दुल रहमान सुलमी

सूफ़ी उद्धरण 40

अपने दोस्तों की ज़िंदगी में ख़ुशियाँ लाओ और उन की ज़रूरतें पूरी करो। उन के ज़ुल्म का जवाब मेहरबानी से दो और उन की ग़लती पर सज़ा दो।

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अपनी आजिज़ी क़ुबूल करो और उस पर मुत्मईन रहो, ताकि दूसरों के सामने ख़ुद को छोटा महसूस करो। आजिज़ी का मतलब सच्चाई को क़ुबूल करना है।

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कीना रखना और इन्तिक़ाम लेना तर्क करो। लोगों को धोखा देना या उन्हें चालाकी से क़ाबू करना या उन पर तन्क़ीद करना और उन के ख़िलाफ़ बातें करना छोड़ दो।

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बुराई का बदला बुराई से दो। यही भाईचारे का रास्ता हमवार करने का तरीक़ा है।

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माफ़ कर दो, फिर चाहे तुम्हारे पास बदला लेने की ताक़त ही क्यों हो।

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