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Sufinama
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चौधरी दल्लू राम

चौधरी दल्लू राम के अशआर

कहीं है आँख आ’शिक़ की कहीं दीदार-ए-जानाँ है

बहार-ए-हुस्न-इ-ताबाँ में तू ही तू है तू ही तू है

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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