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फ़ैज़ी

1547 - 1595 | आगरा, भारत

मुग़लिया सल्तनत के अ’ज़ीम बादशाह जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर के नव-रत्नों में से एक

मुग़लिया सल्तनत के अ’ज़ीम बादशाह जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर के नव-रत्नों में से एक

फ़ैज़ी का फ़ारसी सूफ़ी काव्य

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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