हसन इमाम वारसी के अशआर
सनम का नाज़-ओ-अंदाज़-ओ-अदा क्या
फ़क़ीर-ए-वारसी का मुद्दआ' क्या
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हर गुल है चाक-दामन हर ग़ुंचा दिल-ए-गिरफ्ता
ऐ बाग़बान-ए-क़ुदरत फ़स्ल-ए-बहार क्या है
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टैग : गुल
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सय्याद और गुलचीं दोनों की बन पड़ी है
बुलबुल की फूटी क़िस्मत फ़स्ल-ए-बहार क्या है
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टैग : क़िस्मत
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लगा दी आग उन के शो'ला-ए-आरिज़ ने गुलशन में
ज़र-ए-गुल बन गईं चिंगारियाँ फूलों के दामन में
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टैग : गुलशन
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere