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हुसैन बिन मंसूर हल्लाज

1454 - 1516 | सऊदिया अरबिया

अनल-हक़ का ना’रा लगाने वाला एक शहीद-ए-हक़ सूफ़ी

अनल-हक़ का ना’रा लगाने वाला एक शहीद-ए-हक़ सूफ़ी

हुसैन बिन मंसूर हल्लाज

फ़ारसी सूफ़ी काव्य 14

सूफ़ी उद्धरण 33

मुहब्बत ख़ुदा की अस्ल हक़ीक़त है। मुहब्बत ही तमाम चीज़ों की जड़ है, यही दुनिया और आसमानों के वजूद का सबब है।

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अपने अंदर छिपी रौशनी को तलाश करो। किसी और की रौशनी उधार लेना, इंसान होने की शान नहीं।

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आरिफ़ की पहचान ये है कि वो दुनिया और आख़िरत, दोनों से ख़ाली होता है।

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दोस्त का फेंका हुआ गुलाब भी किसी पत्थर से ज़्यादा चोट पहुँचाता है।

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BETWEEN ME AND YOU THERE LINGERS AN IT IS I. WHICH TORMENTS ME. AH ! LIFT THROUGH MERCY THIS IT IS I. FROM BETWEEN US BOTH !

BETWEEN ME AND YOU THERE LINGERS AN IT IS I. WHICH TORMENTS ME. AH ! LIFT THROUGH MERCY THIS IT IS I. FROM BETWEEN US BOTH !

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