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इनायत ख़ान

1882 - 1927 | हैदराबाद, भारत

इनायत ख़ान के सूफ़ी उद्धरण

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कोई भी चीज़ हक़ीक़त जितनी पुरानी नहीं और कोई भी चीज़ हक़ीक़त की तरह नई नहीं।

कुछ लोग ख़ूबसूरत जगह ढूँढते हैं और कुछ लोग जगह को ही ख़ूबसूरत बनाते हैं।

ख़ुदा दिल को बारहा तोड़ता है, बार-बार तोड़ता है, जब तक कि वो हमेशा के लिए खुल नहीं जाता।

हर इंसान में ख़ुदा का हुस्न मौजूद है, अपने इस एतिमाद के ज़रिए हम अपने भीतर भी उसी हुस्न को पैदा करते हैं।

हक़ीक़त को जानना ही, वह सब कुछ जानना है, जो जाना जा सकता है।

वजह, हक़ीक़त का वहम है।

जो आवाज़ का राज़ जानता है, वो पूरी कायनात का राज़ जानता है।

जब हम फ़ितरत की मौसिक़ी को ग़ौर से सुनते हैं, तो मालूम होता है कि ज़मीन की हर चीज़ उस की हम-आहंगी में अपना किरदार अदा कर रही है।

अपने लिए और दूसरों के लिए ख़ुशी पैदा करना ही मज़हब का पूरा फ़लसफ़ा है।

रूह को रौशन करने वाले अल्फ़ाज़, जवाहरात से भी ज़्यादा क़ीमती हैं।

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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