इनायत ख़ान के सूफ़ी उद्धरण
कोई भी चीज़ हक़ीक़त जितनी पुरानी नहीं और कोई भी चीज़ हक़ीक़त की तरह नई नहीं।
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कुछ लोग ख़ूबसूरत जगह ढूँढते हैं और कुछ लोग जगह को ही ख़ूबसूरत बनाते हैं।
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ख़ुदा दिल को बारहा तोड़ता है, बार-बार तोड़ता है, जब तक कि वो हमेशा के लिए खुल नहीं जाता।
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हर इंसान में ख़ुदा का हुस्न मौजूद है, अपने इस एतिमाद के ज़रिए हम अपने भीतर भी उसी हुस्न को पैदा करते हैं।
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जब हम फ़ितरत की मौसिक़ी को ग़ौर से सुनते हैं, तो मालूम होता है कि ज़मीन की हर चीज़ उस की हम-आहंगी में अपना किरदार अदा कर रही है।
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere