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मयकश अकबराबादी के सूफ़ी उद्धरण
अगर हम सब के हमख़्याल नहीं हो सकते, तो हमें भी सब को अपना हमख़्याल बनाने की फ़िक्र नहीं करनी चाहिए।
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خدا کو ہر لمحہ یاد رکھنے کی مشق اس طرح کرو کہ جب اس کو بھولو تب اس کو یاد کرو۔
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere