बख़्त-ए-ख़ुफ़्ता ने मुझे रौज़ा पे जाने न दिया ओवैद रज़ा क़ादरी
वस्फ़ क्या लिखे कोई उस महबत-ए-अनवार का
हबीब-ए-ख़ुदा का नज़ारा करूँ मैं ओवैद रज़ा क़ादरी
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कैसे काटूँ रतियाँ साबिर
बख़्त-ए-ख़ुफ़्ता ने मुझे रौज़ा पे जाने न दिया ओवैद रज़ा क़ादरी
वस्फ़ क्या लिखे कोई उस महबत-ए-अनवार का
हबीब-ए-ख़ुदा का नज़ारा करूँ मैं ओवैद रज़ा क़ादरी
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