शैख़ जलालुद्दीन थानेसरी के सूफ़ी उद्धरण
आशिक़ों को चाहिए कि वे कश्फ़-ओ-करामत हासिल हो जाने पर बस न करें। उन्हें चाहिए कि वे आगे बढ़ें और किसी भी चीज़ में बंध कर न रहें।
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere