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शैख़ सलीम चिश्ती

1478 - 1572 | फ़तेहपुर, भारत

शैख़ सलीम चिश्ती

सूफ़ी उद्धरण 2

दरवेशों की हड्डियों में, इश्क़-ए-इलाही के चलते अनगिनत सुराख़ होते हैं।

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फ़क़ीरों को किसी से लड़ना नहीं चाहिए।

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