17वीं शती के उत्तार्द्ध व 18वीं शती के पूर्वार्द्ध के निरंजनी संत। इनकी कुछ रचनाएं प्रकाशित भी हो चुकी हैं। इनकी प्रमुख रचनाएं हैं- (1) अमृतधारा, (2) वैराग्य वृन्द, (3) आध्यात्म रामायण और (4) कार्तिक माहात्म्य।
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