Font by Mehr Nastaliq Web
Unknown's Photo'

Unknown

Sufi Quotes of Unknown

26
Favorite

SORT BY

अगर कोई भलाई का काम करने वाले हो, तो अभी करो और अगर कोई बुराई का काम करने वाले हो तो उसे कल पर उठा रक्खो।

अगर यह विचार ध्यान से देखा जाए कि सारे पापों, बुराईयों और अपराधों की जड़ असमानता ही है। जब सभी इंसान एक ही तरीक़े से पैदा होते है, तो कोई वजह नहीं कि बीच का यह दौर—यानी जीवन असमानता से बिताया जाए।

इत्मिनान क़ुदरती दौलत है और बे-इत्मिनानी नकली सिक्कों जैसी है।

सारी पाकीज़गियों में कमाई की पाकीज़गी सब से अज़ीम है, क्योंकि पाक इंसान वो है, जो ईमानदारी से कमाता है। वो इंसान पाक नहीं होता, जो ख़ुद को मिट्टी और पानी से पाक करता है।

तुम जिस से भलाई न कर सके, उस से भलाई की उम्मीद न रखो।

अगर तुम्हारे पास दो पैसे हों तो एक से रोटी ख़रीदो और दूसरे से फूल, रोटी तुम्हें ज़िंदगी देगी और फूल तुम्हें जीने का फ़न सिखाएगा।

क़र्ज़ लेकर पैसा चुकाया जा सकता है, लेकिन हमदर्दी वो क़र्ज़ है जिसे इन्सान कभी नहीं चुका सकता।

अच्छा इन्सान, अपने दुश्मन के लिए एक दोस्त से भी बेहतर होता है।

आज तक कोई ऐसा अज़ीम इन्सान नहीं हुआ, जिस का चाल-चलन आला न हो।

अगर इल्म हासिल करना चाहते हो, तो इंकिसारी से काम लो और जब इल्म हासिल कर लो, तो ख़ुद में और इंकिसारी ले आओ।

ना-इंसाफ़ी बर्दाश्त करने वाला ही मुजरिम होता है। अगर ना-इंसाफ़ी को बर्दाश्त न किया जाए, तो फिर कोई भी शख़्स किसी से ना-इंसाफ़ी नहीं कर सकेगा।

असली मर्द वो है जो सब को देता है मगर किसी से लेता नहीं, आधा मर्द वो है कि जो किसी से लेता है और सब को देता भी है। वो क़तई मर्द नहीं जो सब से लेता है और किसी को बिल्कुल नहीं देता।

एतिमाद से बढ़ कर कोई दवा नहीं है, इलाज तो महज़ एक बहाना है।

अच्छा बनना है तो अच्छों की सोहबत इख़्तियार करो।

अच्छे कामों का मे’यार सिर्फ एक ही है और वो ये कि इंसानियत को मसर्रत हासिल हो।

बुरी बात की मुख़ालिफ़त करना, हिम्मत वाले आदमी ही का काम है।

बेइज़्ज़ती, सज़ा पाने में नहीं बल्कि ज़ुल्म करने में है।

एक अच्छा और पाकीज़ा दिल, अच्छे दिमाग़ से बेहतर है।

Gnosis is like the surging waves-they raise up and they set down.

Gnosis is like the surging waves-they raise up and they set down.

भीख माँगने से बढ़ कर कोई बुराई नहीं।

अच्छे ख़्यालात बेबाक बच्चों की तरह अचानक और यकायक सामने आ खड़े होते हैं और चिल्ला-चिल्ला कर कहने लगते हैं कि, “हम यहाँ हैं, हम यहाँ हैं।“

तुम अच्छे हो और दुनिया तुम्हें बुरा कहे, ये इस से बेहतर है कि तुम बुरे हो और लोग तुम्हें अच्छा कहें।

अगर आप अक़्ल की हिफ़ाज़त में हैं, तो आपको किसी चीज़ की हिफ़ाज़त की ज़रूरत नहीं।

तन्हाई अहमक़ के लिए क़ैदख़ाना है और आलिम के लिए जन्नत।

पैसा न भी हो, तो भी तंदरुस्ती, इल्म और आज़ादी इन्सान की अज़ीम ख़ुशहाली है।

बे-हया इन्सान हार कर भी नहीं हारता और मर कर भी नहीं मरता।

ना-इंसाफ़ी को मिटाओ, लेकिन अपने आप को मिटा कर नहीं।

तकब्बुर इल्म को खा जाता है।

पीर के हाथ पर बैअत दो बार हो सकती है। अगर कोई उसे तोड़ दे या बैअत पर शक करे, तो दोबारा बैअत की जा सकती है।

ये बदन ख़ुद को अब्दी (अमर) समझता है और दुनिया के ऐश उठाने में लगा रहता है। वो ये नहीं समझता कि ये दुनिया एक खेल है।

तौबा गुनाहों को खा जाती है।

वही आदमी अक़्लमंद है, जो अपने दिल को साफ़ करता है।

सच के साथ बने रहो, चाहे इसके लिए तुम्हें कितनी भी बड़ी क़ीमत क्यों न चुकानी पड़े।

झूठ रोज़ी को चट कर जाता है।

ग़म उम्र को खा कर कम कर देता है।

सदक़ा (दान) मुसीबत को खा जाता है।

ज़ुल्म इंसाफ़ को खा जाता है।

ग़ुस्सा समझदारी को खा जाता है।

ख़ुदा की राह के आरिफ़, वो लोग हैं जो इश्क़ में सर से ले कर पैर तक डूबे हुए हैं।

सिर्फ़ सर झुकाने से कोई नर्मदिल नहीं होता। उस शिकारी को क्या कहोगे, जो हिरन का शिकार करते वक़्त झुक कर दोहरा हो जाता है।

जो इंसान दिल की ज़िद के हिसाब से काम करता है, वो आख़िर-ए-कार ख़त्म हो जाता है।

ग़ीबत नेकियों को खा जाती है।

ग़ुरूर में अंधी और पागल दुनिया ऐसे चिंघाड़ती फिरती है, जैसे जंगल में हाथी चिंघाड़ता है।

जिनकी तुम इज़्ज़त करोगे, वे तुम्हें मजबूर समझेंगे और जिनसे तुम मोहब्बत करोगे, वे तुम्हें बेवुक़ूफ़ समझेंगे।

नेकी बुराई को खा जाती है।

ख़ुदा का ख़ौफ़, बे-लगाम बंदे के लिए कोड़े की तरह है। जब ख़ुदा का खौफ़ दिल में आता है, तो दिल के घड़े को चूर-चूर कर देता है।

फ़क़ीर लोगों के लिए बरकत की वजह होता है, मुसीबत की वजह नहीं। फ़क़ीर ख़ुदा के जल्वे देखने में लगा रहे और लोग भूखों मरते रहें, ये फ़क़ीर की शान नहीं है।

पशेमानी सख़ावत को खा जाती है।

इंसान तभी अच्छा जाना जाएगा, जब उस का एहतिराम ख़ुदा के दरबार में भी क़ुबूल होगा।

वो रियाया अंधी है, जिस में इल्म नहीं है। वो चुप-चाप मुर्दे की तरह ज़ुल्म सहती है, क्योंकि उस के पास इल्म नहीं।

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

Recitation

Speak Now