Font by Mehr Nastaliq Web
noImage

याहया दीवान क़ादरी

- 1605 | औरंगाबाद, भारत

याहया दीवान क़ादरी

सूफ़ी उद्धरण 1

صوفی مرقع و سجادہ سے نہیں ہوتا، یاد رکھو صوفی وہ ہے کہ گویا وہ نہیں ہے۔

  • शेयर कीजिए
 

संबंधित सुफ़ी शायर

"औरंगाबाद" के और शायर

 

Recitation

बोलिए