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सूफ़ी लेख
हज़रत शैख़ बू-अ’ली शाह क़लंदर
नफ़्स-ए-अम्मारा तुरा आवार: कर्दहस्त दुनिया पीर-ज़ाल-ओ-पुर-फ़रेब
सूफ़ीनामा आर्काइव
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ना'त-ओ-मनक़बत
अब्दुल बारी हनफ़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
रुख़-ए-पुर-नूर पर अहमद की यूँ ज़ुल्फ़-ए-मु’अंबर हैघटा रहमत की जैसे साया-अफ़्गन चाँदनी पर है
असलम लखनवी
ना'त-ओ-मनक़बत
पुर-नूर है ज़माना सुब्ह-ए-शब-ए-विलादतपर्दा उठा है किस का सुब्ह-ए-शब-ए-विलादत
हसन रज़ा बरेलवी
ना'त-ओ-मनक़बत
रुख़-ए-पुर-नूर का जल्वा दिखा दो या रसूलुल्लाहकरम से आरज़ू दिल की दिला दो या रसूलुल्लाह
मीराँ शाह जालंधरी
कलाम
बहुत ही बे-वफ़ा निकले बहुत ही पुर-जफ़ा निकलेसमझ रखा था हम ने तुम को क्या अफ़्सोस क्या निकले
नादिर देहलवी
ना'त-ओ-मनक़बत
गुंबद-ए-ख़ज़्रा का ’अक्स-ए-पुर-ज़िया है पीलीभीतशेर-ए-अहमद शेर-ए-हैदर का पता है पीलीभीत