शाह अमीन अहमद फ़िरदौसी के अशआर
तुझे बहर-ए-ग़म से गुज़र ने को ऐ 'शौक़'
हमारी ग़ज़ल का सफ़ीन: नहीं है
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टैग : ग़म
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere