चाहिए कि किसी से इल्मी बहस में झगड़ा न करो और तकलीफ न पहुँचाओ। अगर ये समझ लो कि दूसरा हक़ की तरफ़ है, तो उस की बात मान लो और अगर ऐसा नहीं है तो उस को दो-तीन बार समझाओ। अगर न माने तो कहो कि मुझे तो यही मालूम है, मुमकिन है कि जैसा तुम कहते हो वैसा ही हो, फिर झगड़ने की बात क्या है।