Sufinama
Bulhe Shah's Photo'

बुल्हे शाह

1680 - 1757 | उच्च, पाकिस्तान

मुँह दिखलावे और छुपे छल-बल है जगदीस

पास रहे हर मिले इस को बिसवे बीस

उस दा मुख इक जोत है, घुंघट है संसार

घुंघट में ओह छुप्प गया, मुख पर आंचल डार ।।

बुल्लया मैं मिट्टी घुमयार दी, गल्ल आख सकदी एक ।।

तत्तड़ मेरा क्यों घड़या, मत जाए अलेक-सलेक।।

बुल्लया औंदा साजन वेख के, जांदा मूल ना वेख

मारे दरद फ़राक दे, बण बैठे बाहमण शेख ।।

बुल्ला कसर नाम कसूर है, ओथे मूँहों ना सकण बोल

ओथे सच्चे गरदन-मारीए, ओथे झूठे करन कलोल ।।

उन को मुख दिखलाए हैं, जिन से उस की प्रीत

उनको ही मिलता है वोह, जो उस के हैं मीत ।।

इकना आस मुड़न दी आहे, इक सीख कबाब चढ़ाइयां ।।

बुल्लेशाह की वस्स ओनां, जो मार तकदीर फसाइयां ।।

होर ने सब गल्लड़ियां, अल्लाह अल्लाह दी गल्ल

कुझ रौला पाया आलमां, कुझ काग़जां पाया झल्ल।।

आई रुत्त शगूफ़यां वाली, चिड़ियां चुगण आइयां

इकना नूं जुर्रयां फड़ खाधा, इकना फाहीआं लाइयां ।।

बुल्लया कसूर बेदस्तूर, ओथे जाणा बणया ज़रूर

ना कोई पुंन दान है, ना कोई लाग दस्तूर ।।