Sufinama
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दादू साहेब

1544 - 1603 | अहमदाबाद, इंडिया

दादू मैं भिष्यारी मंगिता दरसन देहु दयाल

तुम दाता दुख-भंजिता मेरी करहु सँभाल

भोरे भोरे तन करै वंडै करि कुरबाण

मीठा कौड़ा ना लगै दादू तौहू साण

आज्ञा अपरंपार की बसि अंबर भरतार

हरे पटम्बर पहिरि करि धरती करै सिंगार

दादू आसिक रब्ब दा सिर भी देवै लाही

अल्लाह कारणि आप कौं साँडै अंदरि भाहि

मूए पीड़ पुकारताँ बैद मिलिया आइ

दादू थोड़ी बात थी जे टुक दरस दिखाइ

दादू दरूनै दरदवंद यहु दिल दर्द जाइ

हम दुखिया दीदार के मिहरबान दिखलाइ