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फ़ानी बदायूँनी

1879 - 1941 | हैदराबाद, भारत

फ़ानी बदायूँनी के अशआर

फ़स्ल-ए-गुल आई या अजल आई क्यों दर-ए-ज़िंदाँ खुलता है

या कोई वहशी और पहुंचा या कोई क़ैदी छूट गया

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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