ग़ाफ़िल लखनवी के अशआर
पस-ए-मुर्दन इरादा दिल में था जो कू-ए-क़ातिल का
लहद में ख़ुश हुआ मैं नाम सुनकर पहली मंज़िल का
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टैग : क़ातिल
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere