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Sufinama
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हशम लखनवी

हशम लखनवी के अशआर

नहीं आती क़ज़ा मक़्तल में ख़ौफ़-ए-तेग़-ए-क़ातिल से

इलाही ख़ैर क्यूँ-कर दम तन-ए-बिस्मिल से निकलेगा

नहीं आती क़ज़ा मक़्तल में ख़ौफ़-ए-तेग़-ए-क़ातिल से

इलाही ख़ैर क्यूँ-कर दम तन-ए-बिस्मिल से निकलेगा

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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