हाशिम शाह को सिर्फ़ एक सूफ़ी शाइ’र के तौर पर पहचाना जाता है फ़क़ीरी या सिद्धि उनसे वाबस्ता नहीं हैं| ये ज़ात के बट थे, हाशिम का तअ’ल्लुक़ रणजीत सिंह से भी मिलता है| उनकी तहरीरों में क़िस्सा-ए-शीरीं-फ़रहाद , क़िस्सा-ए-सोहनी, महवाल और दोहा शामिल हैं।
You have exhausted 5 free content pages per year. Register and enjoy UNLIMITED access to the whole universe of Urdu Poetry, Rare Books, Language Learning, Sufi Mysticism, and more.