Sufinama
Kabeer's Photo'

कबीर

1440 - 1518 | लहरतारा, इंडिया

आदि अछर ही अगम है ता को सब बिस्तार

सत-गुरु दया तें पाइए सत्तनाम निज सार

जन्तर तंत्र सब झूठ है मत भरमो जग कोय

सत्त सबद जाने बिना कौवा हंस होय

तन की आस सब छूटई मन का करै बिचार

मन चीन्हे बिन थित नहीं सत-गुरु कहैँ पुकार

तिमिर मलिन तें ना टरे सूर उदय नहिं होय

सत्त सबद जो जानई करम भरम सब खोय