Font by Mehr Nastaliq Web
Makhdoom Khadim Safi's Photo'

मख़दूम ख़ादिम सफ़ी

1814 - 1870 | उन्नाव, भारत

मख़दूम ख़ादिम सफ़ी

ग़ज़ल 34

कलाम 7

फ़ारसी कलाम 1

 

राग आधारित पद 92

भजन 4

 

सूफ़ी उद्धरण 44

अगर सब कुछ सिर्फ़ इल्म-ओ-इबादत पर मुन्हसिर होता, तो शैतान रांदा-ए-दरगाह किया जाता, बल्कि सब कुछ इनायत-ए-इलाही पर मुन्हसिर है।

  • शेयर कीजिए

आदमी के लिए क़ुव्वत मुक़द्दम है, अगर क़ुव्वत जाती रही तो मुजाहिदा मुमकिन नहीं और माँ के दूध की क़ुव्वत चालीस साल तक रहती है, उसके बाद ग़िज़ा की क़ुव्वत है। मंशा यह है कि ‘‘जवानी को ग़नीमत जानो’’।

  • शेयर कीजिए

तवज्जोह इस का नाम है कि एक निगाह तमाम उम्र के लिए काफ़ी हो जाए।

  • शेयर कीजिए

मुरीद वही है, जिस में मुर्शिद की बू आती हो। पेड़ की शाख़ में जब तक क़लम नहीं लगती, तब तक उस पर लज़ीज़ फल नहीं आता।

  • शेयर कीजिए

वज्द में आदमी बेहोश नहीं होता बल्कि बेख़ुद हो जाता है। अगर बेहोश हो गया, तो लुत्फ़ जाता रहता है।

  • शेयर कीजिए

ना'त-ओ-मनक़बत 13

संबंधित सुफ़ी शायर

Recitation

बोलिए