नाज़ाँ शोलापुरी के अशआर
वो छुप गए तो आँख से तारे निकल पड़े
दिल गुम हुआ तो अश्क हमारे निकल पड़े
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ख़ुदा का शुक्र है प्यासे को दरिया याद करता है
मुसाफ़िर ने फ़राहम कर लिया है कूच का सामाँ
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टैग : ख़ुदा
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बा'द मरने के मय-ए-इ’श्क़ की ख़ुश्बू महके
डाल दो ख़ाक मिरी क़ब्र पे मय-ख़ाने की
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere