क़ैसर वारसी के अशआर
जल्वे पिला रहे हैं जो 'क़ैसर' शराब-ए-इ’श्क़
ऐ मर्द-ए-पाक-बाज़ तू घर में ख़ुदा के पी
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का'बा हो बुत-कदा हो कि वो कू-ए-दोस्त हो
दिल तेरा चाहे जिस में उसी घर में जा के पी
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere