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सब्र लखनवी

“अफ़्साना आ’शिक़-ए-दिल-गीर उ’र्फ़ शीरीं फ़र्हाद बित्तस्वीर के मुसन्निफ़।

“अफ़्साना आ’शिक़-ए-दिल-गीर उ’र्फ़ शीरीं फ़र्हाद बित्तस्वीर के मुसन्निफ़।

सब्र लखनवी की ग़ज़लें

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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