शाह अब्दुल लतीफ़ भिटाई के सूफ़ी उद्धरण
इंसान की ज़िंदगी महज़ एक साया है, जिस की सारी शान-ओ-शौक़त एक दिन मिट जाएगी। इसलिए ये ज़रूरी है कि इंसान ख़ुदा के लिए अपनी ज़िंदगी दे दे, उस की तलाश में लग जाए और उस का सच्चा बंदा बनजाए।
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इंसान को परिंदों से भाईचारे का सबक़ सीखना चाहिए, जो आम तौर पर मुहब्बत और भाईचारे के महान जज़्बे के तहत झुंड में रहते हैं।
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घमंडी इंसान की सोहबत से बचना चाहिए, क्योंकि उस की सोहबत तुम्हारे अख़लाक़ को ख़राब कर देगी।
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इंसान को हर हाल में नर्मी बरतनी चाहिए और दिल में बसने वाली ख़ुदाई आवाज़ यानी ज़मीर की सदा की रहनुमाई में रहना चाहिए। अपने अंदर के मुंसिफ़ को तख़्त पर बिठाओ। दुनियावी क़ाज़ी से फ़रियाद क्यों करते हो?
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere