शम्शाद लखनवी के अशआर
हाय क्या अंधेर है कैसी ये चेहरा की चमक
सामने तो सब के फिर महरूम सब दीदार से
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टैग : चेहरा
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere