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तानसेन

1531 - 1587 | बेहट, भारत

संत तुकाराम सत्रहवीं सदी के एक महान संत शाइ’र थे जो लंबे अ’र्से तक चली भक्ती तहरीक के एक अहम रुक्न थे

संत तुकाराम सत्रहवीं सदी के एक महान संत शाइ’र थे जो लंबे अ’र्से तक चली भक्ती तहरीक के एक अहम रुक्न थे

तानसेन का परिचय

तानसेन के पिता मकरन्द पाण्डे ग्वालियर नरेश के आश्रय में रहते थे। तानसेन को तानसे की पदवी भी ग्वालियर नरेश से ही मिली थी। तानसेन के पिता की मृत्यु के विषय में विभी पंडित ने भविष्यवाणी की थी इसलिए उस समय की प्रथा के अनुसार वह तानसेन की बचपन में ही एक सूफी संत हजरत महमूस ग़ौस, ग्वालियरी को सौंप कर तीर्थ यात्रा को निकल गये थें। हज़रत ग़ौस ग्वालियरी ने ही तानसेन का पालन पोषण किया एवं शिक्षा भी दी। तानसेन ने गायन विद्या स्वामी हरिदास जी से सीखी। तानसेन रीवा नरेश के आश्रय में काफी वक्त तक रहे। बादशाह अकबर के आग्रह पर ही रीवा नरेश ने संवत् 1619 में तानसेन को दिल्ली भेजा था। तानसेन महान संगीतज्ञ होने के साथ-साथ महान कवि भी थे। प्रमुख रचनाएँ- (1) संगीत सार, (2) रागमाला और (3) गणेश स्तोत्र। इनकी काव्य भाषा ब्रज है और कुछ पदों में फारसी के शब्द भी मिलते हैं। 

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