तुलसीदास ब्रजवासी के सूफ़ी उद्धरण
अगर तेरी दोनों आँखें सलामत हैं तब भी तू एक आँख वाले को देखकर न हँस, शायद वो एक आँख वाला तुझसे ज़्यादा साहिब-ए-नज़र हो।
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जिस जगह पर मेज़बान को तुम्हारे जाने से ख़ुशी हो और उस की आँखों से मोहब्बत छलक पड़े, तो कभी उधर का रुख़ न करना चाहिए, फिर चाहे वहाँ दौलत ही बरसती हो।
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سچ بول، صبر کو اپنا شعار بنا، پرائی عورت کو محترم سمجھ، اسی میں بہتری ہے۔
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دولت کی دو ادائیں غضب کی ہیں، جب آتی ہے تو اندھا کر دیتی ہے اور جب جاتی ہے تو عقل لے جاتی ہے۔
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جہاں کرم ہے وہاں ایمان ہے، جہاں حرص ہے وہاں مصیبت ہے، جہاں غصہ ہے وہاں تباہی ہے۔
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere