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Sufinama
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वाजिद जी दादूपंथी

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वाजिद जी दादूपंथी की साखी

स्वारथि साथी जगत सब, बिन स्वारथ नहिं कोइ।

बाजीदा बिन स्वार्थी, अपलट अबिहर सोइ।।

बाजीद दास के पास कौं, फल कहा बरनैं कोइ।

तांबै तै कंचन भयौ, पारस परसैं लोइ।।

बाबै सकरा सांनि करि, पै पानी परि देइ।

बाजीद निंहचैं नींब कौ, करवौई फर लेई।।

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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