Sufinama
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वाजिदजी दादूपंथी

1651

जाति के पाठन थे। हिरन का शिकार करते समय दया उमड़ी और संत दादू दयाल के शिष्य बन गये। इन्होंने लगभग 16 ग्रंथों की रचना की है।