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शाह नियाज़ अहमद बरेलवी

1775 - 1834 | बरेली, भारत

हिन्द-ओ-पाक के मा’रूफ़ रुहानी शाइ’र

हिन्द-ओ-पाक के मा’रूफ़ रुहानी शाइ’र

शाह नियाज़ अहमद बरेलवी

ग़ज़ल 24

शे'र 18

कलाम 15

फ़ारसी कलाम 44

सूफ़ी उद्धरण 1

मौत का वक़्त बहुत सख़्त है। इस की मिसाल ऐसी है, जैसे किसी काँटेदार पेड़ पर कपड़ा डाल कर खींचा जाए और वह तार-तार हो जाता है। यही हालत रूह की है, जब निकलती है तो हर रग खिंच जाती है।

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