बेदार शाह वारसी के अशआर
मुझ ख़स्ता-दिल की ई’द का क्या पूछना हुज़ूर
जिन के गले से आप मिले उन की ईद है
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आईना-ख़ाना बना सूरत-ए-वारिस 'बेदम'
लुत्फ़-ए-नज़्ज़ारा-ए-सरकार मुबारक बाशद
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अब तो नज़र में दौलत-ए-कौनैन हेच है
जब तुझ को पा लिया दिल-ए-उम्मीद-वार ने
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शम्अ' के जल्वे भी या-रब क्या ख़्वाब था जलने वालों का
सुब्ह जो देखा महफ़िल में परवाना ही परवाना था
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टैग : ख़्वाब
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere