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हफ़ीज़ होश्यारपुरी

1912 - 1973 | कराची, पाकिस्तान

अपनी गज़ल “मोहब्बत करने वाले कम न होंगे” के लिए मशहूर

अपनी गज़ल “मोहब्बत करने वाले कम न होंगे” के लिए मशहूर

हफ़ीज़ होश्यारपुरी के अशआर

हैरत-ए-इ’श्क़ मिरी हुस्न का आईना है

देखने वाले कहाँ से हैं कहाँ तक पहुँचे

हाल-ए-दिल है कोई ख़्वाब-आवर फ़साना तो नहीं

नींद अभी से तुम को यारान-ए-महफ़िल गई

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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