हफ़ीज़ होश्यारपुरी के अशआर
हैरत-ए-इ’श्क़ मिरी हुस्न का आईना है
देखने वाले कहाँ से हैं कहाँ तक पहुँचे
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हाल-ए-दिल है कोई ख़्वाब-आवर फ़साना तो नहीं
नींद अभी से तुम को ऐ यारान-ए-महफ़िल आ गई
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere